अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

वर्कर राइट्स कन्सोर्शियम (WRC) की शुरुआत कैसे हुई?

सन् 1998 में संयुक्त राज्य अमेरिका में छात्रों, प्रोफेसरों और विश्वविद्यालयों के अन्य सदस्यों ने महसूस किया कि विश्वविद्यालयों के लोगो वाले कपड़े बनाने वाले कई कारखानों में श्रमिकों के अधिकारों का सम्मान नहीं किया जाता। अमेरिका में कॉलेज के कपड़े बेचना एक बड़ा व्यवसाय है। कारखानों में श्रम अधिकारों के उल्लंघन के बारे में जानने पर, कॉलेजिएट क्षेत्र के अन्दर और बाहर, कई लोग इसके बारे में चिंतित हो गए। इस समस्या से निपटने के लिए, विश्वविद्यालयों ने आचार संहिता लागू की जिसके तहत श्रमिकों के अधिकारों के सम्बन्ध में कुछ बुनियादी मानकों को मानना आवश्यकता था। डब्ल्यूआरसी का गठन यह सुनिश्चित करने के लिए किया गया कि आचार संहिता के शर्तों का पालन किया जाए। डब्ल्यूआरसी का मकसद श्रमिकों का समर्थन करना है जो कारखानों में स्थितियों में सुधार के तरीके तलाश रहे हैं। संहिता के अनुपालन के लिए, डब्ल्यूआरसी कारखानों में काम करने की स्थिति की जाँच करने, इन जाँचों पर रिपोर्ट प्रकाशित करने और कोड का उल्लंघन पाए जाने की स्थिति में स्थितियों में सुधार के तरीकों की तलाश करने के लिए ज़िम्मेदार है।

डब्ल्यूआरसी का गठन मध्य अमेरिका और एशिया में श्रम और मानवाधिकार आन्दोलन के लोगों के परामर्श से, अमेरिकी मानवाधिकार और श्रम अधिकार विशेषज्ञों और विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों और छात्रों के एक गठबंधन द्वारा किया गया था। डब्ल्यूआरसी का मार्गदर्शन करने के लिए मानवाधिकार और श्रम अधिकार विशेषज्ञों से बनी एक सलाहकार परिषद का गठन किया गया था।

 

डब्ल्यूआरसी की जाँच कैसे काम करती है?

डब्ल्यूआरसी की जाँच में कारखाने के बाहर, घरों में या समुदाय में कहीं श्रमिकों केसाथ व्यापक साक्षात्कार किए जाते हैं। डब्ल्यूआरसी फ़ैक्टरी प्रबंधकों,सरकार, प्रांत या देश के श्रम निरीक्षकों, संघ प्रतिनिधियों, शिक्षाविदों, श्रम वकीलों और अन्य व्यक्तियों से भी मिलता है जो श्रमिकों के हितों की निगरानी प्रक्रिया में मदद कर सकते हैं। यदि प्रबंधक इसकी अनुमति देते हैं, तो डब्ल्यूआरसी कारखाने का ऑन-साइट निरीक्षण करता है। इसके बाद, डब्ल्यूआरसी प्राप्त डेटा और साक्षात्कारों का विश्लेषण करता है और फिर आचार संहिता के अनुपालन के सम्बन्ध में निष्कर्ष निकालता है। जब उल्लंघनों की पहचान कर ली जाती है तब डब्ल्यूआरसी सुधार की कार्रवाई की सिफारिश करता है। इस आशय की एक आधिकारिक रिपोर्ट संयुक्त राज्य अमेरिका में प्रकाशित की जाती है और कुछ मामलों में, उन जगहों और समुदायों द्वारा अनुवाद करके प्रसारित की जाती है जहाँ वे उल्लंघन हुए थे।

डब्ल्यूआरसी यह नहीं मानता कि आचार संहिता के प्रत्येक मुद्दे के सम्बन्ध में मात्र कुछ दिनों की जाँच निश्चित निष्कर्ष निकालने के लिए पर्याप्त है। व्यावहारिक कारणों से, जाँच में उन मुद्दों को प्राथमिकता दी जाती है जो स्वयं श्रमिकों द्वारा या कारखाने और उद्योग के बारे में जानकारी रखने वाले अन्य लोगों द्वारा उठाए गए हों।

डब्ल्यूआरसी श्रमिकों को उन श्रम अधिकारों पर शैक्षिक कार्यक्रम भी प्रदान करता है जो उत्तरी अमेरिकी विश्वविद्यालयों की आचार संहिता में शामिल हैं। हमारा उद्देश्य एक ऐसा तंत्र बनाना है, जिसका उपयोग स्थानीय संगठनों के माध्यम से श्रमिक या कार्यकर्ता कोड उल्लंघन के बारे में अपनी शिकायत दर्ज करने के लिए कर सकें और उन्हें डब्ल्यूआरसी में भी ला सकें। कोई भी निगरानी संस्था साल के प्रत्येक दिन हर एक कारखाने में मौजूद नहीं हो सकती। इसीलिए, डब्ल्यूआरसी का मानना है कि आचार संहिता का सम्मान सुनिश्चित करने का सबसे अच्छा तरीका है प्रत्येक कारखाने में श्रमिकों को स्वयं अपना मॉनिटर बनने के लिए प्रशिक्षित करना।

डब्ल्यूआरसी पूरी तरह से निष्पक्षता के लिए प्रतिबद्ध है। इसके अलावा, डब्ल्यूआरसी सूचना के स्रोत के रूप में भी काम करने काप्रस्ताव करता है ताकि इच्छुक व्यक्ति उत्तरी अमेरिकी विश्वविद्यालयों के लिए कपड़े बनाने वाले कारखानों की वर्तमान स्थिति के बारे में विस्तार से और निरपेक्ष रूप से जान सके।

 

डब्ल्यूआरसी जाँच के लिए फ़ैक्ट्रियों का चयन कैसे करता है?

डब्ल्यूआरसी किसी कारखाने की जाँच वहाँ के किसी कर्मचारी से प्राप्त सीधी शिकायत के आधार पर या फिर पदेन या एक्स-ऑफिशिओ जाँच (अर्थात ऐसी जाँच जिन्हें किसी तीसरे पक्ष द्वारा किए जाने की आवश्यकता नहीं होती) के रूप में करता है।

जबडब्ल्यूआरसी को उत्तर अमेरिकी विश्वविद्यालय के लिए कपड़े बनाने वाली फैक्ट्री के किसी कर्मचारी से शिकायत मिलती है, तो वह आधिकारिक जाँच शुरू करने का निर्णय लेने में नीचे दी गई बातों पर विचार करता है- श्रम अधिकारों केउल्लंघन की गंभीरता, स्थानीय संगठनों की राय, शिकायत की विश्वसनीयता और प्रभावित संबद्ध विश्वविद्यालयों की संख्या, यानी डब्ल्यूआरसी से संबद्ध विश्वविद्यालयों की संख्या जिनके लिए उसी कारखाने में वस्त्र उत्पादन होता है।

डब्ल्यूआरसी कुछ ख़ास परिस्थितियों में पदेन या एक्स-ऑफिशिओ जाँच (अर्थात ऐसी जाँच जिन्हें किसी तीसरे पक्ष द्वारा किए जाने की आवश्यकता नहीं होती) शुरू करता है। उदाहरण के लिए, अगर किसी स्थानीय संगठन से किसी कारखाने में गंभीर समस्याओं के आरोप की जानकारी मिलती है या फिर जब कोई कारखाना विश्वविद्यालयों के लिए बहुत अधिक कपड़े उत्पादन करता है लेकिन वहाँ की स्थिति के बारे में जानकारी नहीं हो, आदि।

 

डब्ल्यूआरसी को कुछ फैक्ट्रियों में रुचि क्यों है और अन्य में क्यों नहीं?

डब्ल्यूआरसी चाहता है कि सभी कारखानों में श्रम अधिकारों का सम्मान किया जाए, लेकिन केवल विश्वविद्यालयों के लिए कपड़े बनाने वाले कारखानों में ही उल्लंघन होने पर बदलाव या सुधार की कार्रवाई की मांग की आधिकारिक ताकत हमारे पास है। हमारी आशा है कि डब्ल्यूआरसी विश्वविद्यालयों के लिए उत्पादन करने वाली फैक्ट्रियों की स्थितियों में सुधार लाए और फिर ये फ़ैक्टरियाँ अन्य कारखानों के लिए सकारात्मक उदाहरण के रूप में काम करेंगी।

 

विश्वविद्यालयों के लिए उत्पादन करने वाली फैक्ट्रियों की सूची कहाँ से आती है?

डब्लूआरसी से संबद्ध विश्वविद्यालयों को अपने डीलरों या उन कम्पनियों, जो विश्वविद्यालय के नाम या लोगो के साथ कपड़े बनाने के लिए अनुबन्ध करती हैं और उनके लिए उत्पाद बनाती हैं, की एक सूची साझा करनी पड़ती है। इस जानकारी के आधार पर डब्लूआरसी प्रत्येक कारखाने के पते के साथ, उन की एक विस्तृत सूची बनाता है जो विश्वविद्यालयों के लिए वस्त्रों का उत्पादन करते हैं।

 

यदि डब्ल्यूआरसी के साथ समस्या आती है तो क्या ब्रांड अपना अनुबन्ध रद्द कर देते हैं?

डब्ल्यूआरसी हमेशा यह सुझाव देता है कि एक बहुराष्ट्रीय कम्पनी उस फैक्ट्री में बनी रहे और वहाँ की स्थिति में सुधार लाने का प्रयास करे। डब्ल्यूआरसी का मानना है कि जो कम्पनी अनुबन्ध समाप्त करके किसी दूसरे कारखाने में भाग जाती है, वह अपनी ज़िम्मेदारियों को उचित ढंग से पूरा नहीं कर रही है। मेक्सिको में कुकडोंग कारखाने के मामले में डब्ल्यूआरसी ने नाइकी कम्पनी को उसी कारखाने में बने रहने और वहाँ की स्थितियों में सुधार करने के लिए मजबूर किया। नाइकी ने डब्ल्यूआरसी की सिफ़ारिश स्वीकार की।

 

क्या डब्ल्यूआरसी जाँच के नतीजे जनता को दिखाए जाते हैं?

हाँ, सभी रिपोर्टें प्रकाशित की जाती हैं और कुछ का स्थानीय भाषाओं में अनुवाद भी किया जाताहै। साथ ही हम इस बात को भी महत्त्वपूर्ण मानते हैं कि शिकायत करने वाले या साक्षात्कार में भाग लेने वाले श्रमिकों की पहचान पूरी तरह से गोपनीय रखी जाए।

 

क्या बहुत सारी आचार संहिताएँ हैं? विभिन्न आचार संहिताओं के तहत श्रमिक और उनके सहयोगी अपने मौजूदा अधिकारों के बारे में कैसे जान सकते हैं?

यह सच है कि कई कोड हैं और इससे दुविधा हो सकती है। लेकिन कई कोड आपस में काफी समान भी हैं। अधिकांश कोड अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय कानूनों के अनुसार बनाए गए हैं और एक समान मानकों को मानते हैं, जैसे कि न्यूनतम वेतन, काम के घंटे, संघ की स्वतंत्रता और सामूहिक अनुबन्ध, गैर-भेदभावपूर्ण रवैया, महिलाओं के अधिकार आदि। एक कार्यकर्ता जो किसी मुद्दे के बारे में शिकायत करता है, चाहे वह राष्ट्रीय कानून हो या अंतर्राष्ट्रीय, या फिर संहिता के किसी विशेष प्रावधान के तहत, उसकी शिकायत के कई रूपों में वैध होने की संभावना रहती है।

 

डब्ल्यूआरसी शासन प्रणाली कैसे काम करती है?

डब्ल्यूआरसी में 18 सदस्यीय निदेशक मंडल है। इस परिषद में विश्वविद्यालय प्रशासकों के छह प्रतिनिधि, छात्र संगठन, यूनाइटेड स्टूडेंट्स अगेंस्ट स्वेटशॉप्स (यूएसएएस) के छह प्रतिनिधि और श्रम अधिकारों के छह विशेषज्ञ प्रतिनिधि शामिल हैं।

 

डब्ल्यूआरसी को वित्त पोषण या फाइनेंस कहाँ से मिलता है?

डब्ल्यूआरसी की लगभग 65% फंडिंग विश्वविद्यालय संबद्धता शुल्क से, 25% संघीय और फाउंडेशन अनुदान से और शेष व्यक्तियों और अन्य भागीदारों से आती है, जिनके लिए डब्ल्यूआरसी निगरानी कार्य करता है।

 

डब्ल्यूआरसी और यूनियनों के बीच क्या सम्बन्ध है?

डब्ल्यूआरसी एक ऐसा संगठन है जो कामकाजी परिस्थितियों की जाँच करता है, यह श्रमिकों का प्रतिनिधित्व नहीं करता। डब्ल्यूआरसी की भूमिका श्रमिकों का प्रतिनिधित्व करने वाली यूनियनों की जगह नहीं ले सकता और ना ही उसे ऐसा करना चाहिए। डब्ल्यूआरसी श्रमिकों का अपनी यूनियन बनाने के अधिकार और सामूहिक रूप से अनुबन्ध पर चर्चा करने के अधिकार का पूरी तरह से समर्थन करता है। डब्ल्यूआरसी मानता है कि वास्तविक और दीर्घकालिक परिवर्तन के लिए यूनियनें आवश्यक हैं। साथ ही, डब्ल्यूआरसी यह भी मानता है कि ट्रेड यूनियन कामकाजी परिस्थितियों पर जानकारी का एक महत्त्वपूर्ण स्रोत होते हैं। डब्ल्यूआरसी वैश्विक दक्षिण में यूनियनों के साथ ऐसे सम्बन्ध बनाने के लिए काम करता है जो पारस्परिक रूप से, सभी के लिए फायदेमंद हों।